Tag - जैन_उपदेश

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आदर्श भगवान वह जो निंदकों से द्वेष और प्रशंसकों से राग नहीं करता; भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज

धर्मनगरी सहारनपुर के बीर नगर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने अपने उपदेशों में कहा कि आदर्श भगवान वही हैं जो प्रशंसा से...

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मन में कुछ और वचन में कुछ कहना मायाचारी है : तिर्यंच गति दुखों से भरी है, मायाचारी से बचो : आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज

रामगंजमंडी में आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने प्रवचन में मायाचारी और तिर्यंच गति के दुखों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन, वचन और क्रिया में स्पष्टता जरूरी...

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