Tag - जिनेन्द्र भगवान

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भगवान ने द्रव्य, भाव और नौ कर्म रूप जन्म-जरा-मरण रूपी नगर को नष्ट किया — आचार्य वर्धमान सागर जी : सहस्त्रनाम विधान की पूजा में भगवान के गुणों का वर्णन

सहस्त्रनाम मंडल विधान के दौरान आचार्य वर्धमान सागर जी ने बताया कि भगवान ने द्रव्य, भाव और नौ कर्म रूप तीन पुर — जन्म, जरा और मरण रूपी नगर को नष्ट किया है। पूजन...

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आचार्य योगिन्द्र सागरजी महाराज का 13वां समाधि दिवसः अतिशय क्षेत्र योगिन्द्रगिरी में होंगे आयोजन

अतिशय क्षेत्र योगिन्द्रगिरी मे आचार्य योगिन्द्र सागरजी का तेरहवा समाधि दिवस सकल दिगम्बर जैन समाज सागवाड़ा के संयोजन में मनाया जाएगा। समाज के प्रतिष्ठाचार्य...

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अंतरंग आत्मा पर लगे कर्मों को संयम तप साधना के माध्यम से हटाया जाता है-आचार्य श्री वर्धमान सागरजीः राग-द्वेष के कारण कर्मों का बंध होता है 

मुंगाणा में संघ सहित विराजित आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने दोपहर को शास्त्र स्वाध्याय में अंतरंग और बहिरंग तप की विवेचना की। बगुले के माध्यम से बताया कि बगुला...

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हर व्यक्ति को अपने जीवन में भगवान की आवश्यकता होती हैः मुनिश्री पुण्यसागरजी महाराज

बिना भगवान के भक्ति नहीं हो सकती है और बिना भक्त के भगवान की पहचान नहीं हो सकती।‘ उक्त विचार दिगम्बर जैन मुनि पुण्य सागरजी महाराज ने श्री महावीर दिगम्बर जैन...

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