Tag - जिनेन्द्र प्रभु

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रेयांश जैन ने ग्रहण किए जैन धर्म के सिद्धांत : आठ वर्ष पूर्ण होने पर प्रथम बार किया अभिषेक

जैन धर्म एक सैद्धांतिक धर्म है। जैन धर्म के अपने नियम और सिद्धांत हैं। यदि कोई व्यक्ति जैन कुल में पैदा हुआ होकर जैन धर्म के सिद्धांतो का पालन नहीं करता है...

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सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभः आचार्य धर्मसागरजी का 57वां आचार्य पद एवं आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का 57 संयम वर्ष मनाया गया 

फागुन माह की अष्टाहिंका पर्व के पूर्व दश लक्षण पर्व आते है। यह पर्व वर्ष में 3 बार आते है। सिद्ध भगवान अशरीरी हैं उनके पूजन के साथ भक्ति से हम शरीरी मानव की...

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जन्म, मरण संयम, तप, साधना पूर्वक समाधि मरण से सार्थक होता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः त्याग की प्रेरणा लेना चाहिए

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अनेक जिनालयों मुनियों की जन्मस्थली धर्म नगरी धरियावद में 52 साधु सहित विराजित हैं। प्रतिदिन दोपहर को आचार्यश्री सानिध्य में...

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सात दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति की कामना हेतु महायज्ञः 7 से 14 मार्च तक भीण्डर में आचार्यश्री वर्द्धमान सागरजी के मंगल आशिर्वाद से होगा

सात दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति की कामना हेतु यज्ञ का आयोजन श्री दशानरसिंहपुरा समाज पंचायती, नोहरा में होने जा रहा है। प्रत्येक श्रावक...

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सात दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति की कामना हेतु यज्ञः 26 जनवरी को घटयात्रा, ध्वजारोहण एवं चित्र अनावरण के साथ शुभारंभ

सात दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति की कामना हेतु यज्ञ का आयोजन बड़े जैन मंदिर में होने जा रहा है। प्रत्येक श्रावक को अपने जीवन काल में एक...

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