Tag - चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज

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पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं-आचार्य श्री वर्धमान सागरजीः गुणानुवाद कर पूजा में 1024 अर्घ्य समर्पण किए

पूज्यता ऐसे ही नहीं आती है। यह गुणों से प्राप्त होती है। पूजा में प्रमाद का कोई स्थान नहीं है। प्रमाद से पूजा के फल की प्राप्ति भी नहीं होती है। उक्त विचार...

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आचार्य श्री वर्द्धमानसागर जी महाराज के सान्निध्य में शताब्दी समारोह का होगा भव्य शुभारंभ : 3 अक्टूबर से चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव का त्रिदिवसीय भव्य आयोजन

बीसवीं शताब्दी के प्रथमाचार्य, चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज आचार्य पद प्रतिष्ठापन शताब्दी महोत्सव का त्रिदिवसीय भव्य आयोजन परम पूज्य...

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