Tag - आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज

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गुरुओं का सान्निध्य पुण्यशाली जीवों को ही मिलता है : मुनिश्री विलोकसागरजी का धौलपुर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ गूंजे जयकारे

जब तक श्रावक हैं, तभी तक श्रमण परंपरा कायम हैं। जब श्रावक ही नहीं होगें, तो श्रमण परंपरा स्वतः समाप्त हो जाएगी। दिगंबर साधुओं की परंपरा को जारी रखने में...

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