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भक्ति और समर्पण में कोई विकल्प नहीं होता : मुनिश्री संभवसागरजी ने प्रवचन में भक्ति समर्पण और भक्त की मनःस्थिति का सटीक वर्णन किया 

भक्ति में सिर्फ समर्पण होता है। उसमें कोई विकल्प नहीं होता। जितना आपका भगवान और गुरु के प्रति अनुराग और समर्पण होगा। उतने ही आपके परिणाम निर्मल होंगे और कर्म...

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