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श्रावकों की दो रोटी में ही तपस्वियों का मोक्ष है : आर्यिका श्री यशस्विनी मति माताजी के सान्निध्य में विद्वत संगोष्ठी एवं अलंकरण समारोह हुआ

जैन धर्म, जैन संस्कृति, संस्कार को संरक्षित करने के लिए गुरु, देव और शास्त्र जरूरी है। स्वाध्याय के बिना बहिरात्मा अंतरात्मा नहीं बन सकती। यह सारत्व रविवार को...

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