मुरैना में दसलक्षण पर्व के आठवें दिन बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर जी और मुनिश्री विबोध सागर जी ने कहा कि उत्तम त्याग का अर्थ केवल वस्तुओं का त्याग...
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मुरैना के बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागरजी ने प्रवचन में कहा कि इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्म संयम ही उत्तम तप धर्म है। पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन अनंत...
दिगम्बर जैन मुनि परंपरा के पुनरुद्धारक प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पुण्य स्मृति में पद-शताब्दी महोत्सव आयोजित हुआ। उनके तप, त्याग और संयम से...
टोंक नगर में आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि ज्ञान आत्मा का दर्पण है जिसके द्वारा अपनी कमियों को सुधारा जा सकता...








