Tag - Ratnatraya Dharma

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श्रावकों का जीवन मन, वचन और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल : आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण ने निवाई में प्रवेश कर दोपहर को किया विहार 

आचार्य वर्धमान सागर जी जैन समाज के निवेदन पर शीतकालीन प्रवास 32 साधुओं के साथ पार्श्वनाथ नसिया जी संत भवन में कर रहे हैं। जबसे आचार्य श्री पधारे है, प्रति...

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24 घंटे में एक कार्य स्वार्थ रहित होकर अवश्य करें : आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा-जीवन संवर जाएगा

जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पिच्छी) के साथ प्रथम बार प्राचीन धर्मनगरी रामपुर मनिहारान...

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