Tag - Pattaacharya Vishuddh Sagar

समाचार

अभिमान त्यागने से ही मिलता है आत्मिक सुख और शांति : अहंकार विष के समान, मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है – पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी

पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...

You cannot copy content of this page