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धर्म बुढ़ापे में नहीं यौवनावस्था में अपनाएं : मुनिश्री विहसंत सागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में दिया दिव्य प्रबोधन 

आचार्यों ने कहा है कि धर्म तो प्रारंभ से ही करना चाहिए। बुढ़ापे में जब आपके अंग शिथिल हो जाएंगे तो धर्म की उपासना कैसे होगी। यह उद्गार आचार्यश्री विराग सागरजी...

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