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लोभ-लालच और लिप्सा से निवृत्ति ही शौच धर्म है : उत्तम शौच धर्म पर मुनिश्री प्रमाणसागर के विचारों से मिली श्रावकों को प्रेरणा 

दशलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर उत्तम शौचष्धर्म की व्याख्या करते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा- मन की तरंग मार ले, बस हो गया भजन; आदत बुरी सुधार ले, बस...

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