निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने बताया कि जीवन में केवल यह जानना कि सामने वाला मेरे बारे में क्या सोच रहा है, यह बहुत जरूरी है। यह ज्ञान हमारे...
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जो वस्तु जिस रूप में होती है, वह सदा शक्तिहीन को अपने पक्ष में करने का प्रयास करती है। यदि हमारा उपादान कमजोर है, तो निमित्त हमेशा उसे अपने अनुसार चला लेगा।...
महान व्यक्ति दो प्रकार के होते हैं। एक वह जो अपनी साधना, तपस्या और पुण्य से महान बनते हैं। वे अपनी आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ते हैं। दूसरी प्रकार की महान...
बगीचा संस्कारों से बनता है, जंगल संस्कारों से नहीं बनते हैं वो प्रकृति से बनते है। हवाएं जो चलती हैं वह प्रकृति से हैं लेकिन ऑक्सीजन जो है वह एक संस्कारित वायु...
सारी दुनिया को जब हम व्यापक दृष्टि से देखते हैं, तो यह दो रूपों में दिखाई देती है—एक प्रकृति के रूप में और दूसरा संस्कृति के रूप में। जब हम प्रकृति की ओर देखते...
पूज्य निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने चक्रवर्ती विवाह के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण और विचारणीय वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती विवाह का...
सारी दुनिया मेरे काम आवे, ये अपनी जिंदगी का सबसे पतन का सूत्र है और यही अपना डाउनफॉल करता है, इसी से सब कुछ शुभ होते हुए अशुभ हो जाता है। हर वस्तु पर हम अपना...
मुनि श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि प्रथम बार में ही गणधर परमेष्ठी सम्पूर्ण श्रुत का ज्ञान कर लेते है, लाखों करोड़ों वर्षों तक भगवान जब बोलते हैं तो...
श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर (जयपुर) के तत्वावधान में और निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में भाग्योदय तीर्थ सागर में 26 अक्टूबर से 28...
दुनिया में हमें किसी को पर मानने का अधिकार नहीं है, मैं स्व तो हूं लेकिन दुनिया पर नहीं हैं। दुनिया को दुनिया की दृष्टि से देखो तो स्व की अनुभूति होती है...








