नगर में विराजमान आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में सम्यक दर्शन का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। जब व्यक्ति को सम्यक दृष्टि...
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‘जीवन है पानी की बूंद’ महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज, जिनके पादमूल में 35 पिच्छीधारी संयमी साधक संयम की साधना, रत्नत्रय की...
108 सौम्य सागरजी महाराज, अकोला में विराजमान है। विचित्र बाते प्रणेता प.पू.मुनिश्री 108 सर्वार्थसागरजी ने कहा की, जिंदगी का खेल कबड्डी की तरह है। सफलता की लाईन...








