धरियावद स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन क्षुल्लक 105 श्री महोदय सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को अहंकार और वहम से दूर रहने...
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स्थानीय जैन धर्मशाला में 48 वें दिन मुनि श्री विव्रत सागर जी मुनिराज ने प्रवचन करते हुए आत्म-पहचान के महत्व पर जोर देते हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं को शरीर या...
व्यक्ति एक होता है लेकिन 24 घंटे में उसे नाना रूप धारण करने पड़ते हैं, एक वस्तु नाना रूप धारण कर सकती है उसमें अनन्त शक्ति विद्यमान रहती है, एक आँख कितना देख...
अंग्रेज तो चले गए परन्तु हम आज़ तक उनके द्वारा लादे गए कुसंस्कारों का बोझ ढोते जा रहें हैं। आचार्यश्री विद्यासागरजी महा मुनिराज ने उक्त बातों का गहन चिंतन करते...
गुरु की अवर्णनीय महिमा का वर्णन बस इतना ही है कि प्रतिपल उनका जाप, उनका नाम ,आपके मन पर ,वचनों पर, और शरीर के एक एक अवयव पर स्पंदित होता रहे ।गुरु यह एक ऐसा...








