हजारों वर्ष से हम रावण का पुतला जला रहे हैं और रावण के किए पापों को पाले हुए हैं। यह बात आर्यिका सिद्ध श्री माताजी ने कही। वहीं मुनिश्री शुद्धोपयोग सागर जी ने...
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नरक गति और तिर्यंच गति के भयंकर दुःखों को सहन करके हमने मनुष्य गति तक का आधे से ज्यादा रास्ता पार कर लिया है। अब इस जगह से पुनः नीचे की गतियां नहीं प्राप्त...
पंडित दौलत राम जिनशासन के उच्च कोटि के विद्वान हुए हैं। जिन्होंने अपनी रचनाओं में आध्यात्म का सागर भर दिया है। यही वजह है कि जैन समाज के प्राचीन कवियों में...








