दशलक्षण महापर्व के अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में सत्य धर्म की गहन विवेचना करते हुए कहा कि वचन ही सत्य है और आत्मा ही वास्तविक सत्य है।...
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आचार्य वर्धमान सागर जी ने टोंक चातुर्मास प्रवचन में कहा कि साधु का जीवन आगम अनुसार होना चाहिए। समाज को संगठित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रथमाचार्य...








