हमारी आत्मा से अनंत भव के छह कर्म चिपके हुए हैं। जब तक उन कर्मों का क्षय नहीं होगा, तब तक आत्मा निर्विकार और शुद्ध नहीं होगी। यह उद्गार राष्ट्रसंत आचार्य...
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गणाचार्य विराग सागर जी से दीक्षित आचार्य श्री विहर्षसागरजी, मुनिश्री विजयेशसागरजी एवं मुनि श्री विश्व हर्ष सागरजी ने सोमवार को शोभायात्रा के साथ दिगंबर जैन...
वर्तमान समय में समाज की एकजुटता आवश्यक है और समय की भी यही मांग है। यह उद्गार शनिवार को श्री दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में राष्ट्रसंत आचार्य श्री...








