Tag - 24 समवशरण

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कषायों को रोककर आत्म स्वभाव में रमना ही धर्म : आचार्यश्री विमर्श सागर जी के सान्निध्य में मुजफ्फरनगर में पहली बार 24 समवशरणों की आराधना 

‘जीवन है पानी की बूंदे’ महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी ससंघ 35 पिच्छी के सानिध्य में नगर के नई मंडी क्षेत्र में श्री कल्पतीर्थ मंडपम में...

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तीर्थ चक्रवर्ती बनकर तीर्थों के संरक्षण में लगाएं पुण्य : आचार्य श्री विमर्शसागर जी के सान्निध्य में चल रही है कल्पद्रुम महामंडल विधान की आराधना

नगर में 24 समवशरणों की अनुपम रचना की गई है। कल्पतीर्थ मण्डपम् में श्री 1008 कल्पद्रुम महामण्डल विधान की आराधना चल रही है।आचार्य श्री विमर्श सागर जी के विशाल...

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