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जैन समाज में बढ़ता दिखावा उपेक्षित निर्धन वर्ग एक चिंतन: वास्तविक सेवा, जो धर्म का सार है। वह कहीं पीछे छूटी 

धर्म का उद्देश्य केवल रीति-रिवाजों और आयोजनों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसका मुख्य लक्ष्य समाज के हर व्यक्ति को सन्मार्ग की ओर ले जाना है। विशेषकर उस व्यक्ति...

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