समय और सांस का कोई भरोसा नहीं हैं, ये दोनों ही निकल जाएं तो वापिस नहीं आते । श्वास तो कर्मो के अधीन हैं, लेकिन समय को हम पकड़ सकते हैं, समय के अनुरूप चल सकते...
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यदि गृहस्थ जीवन में रहकर मनुष्य अपने पापों का नाश करना चाहता है और अपने पुण्य का संचय करना चाहता है एवं मनुष्य पर्याय को सार्थक करना चाहता है । लेकिन वह त्याग...








