मुरैना में युगल मुनि श्री विलोक सागर जी एवं मुनि श्री विबोध सागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित पंच परमेष्ठि प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सैकड़ों...
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पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...
मुरैना के बड़े जैन मंदिर में 24 अगस्त को आयोजित तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में लगभग 250 साधर्मी बंधु, माताएँ, बहनें, युवा और बच्चे शामिल हुए।...
आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज ने रामगंजमंडी में प्रवचन देते हुए कहा कि मोह और मूर्छा भाव के कारण मनुष्य धर्म और संयम से भटक जाता है। मनुष्य जन्म को धर्म...








