Tag - समवशरण

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सात मंजिला भव्य समवशरण बना आस्था का केंद्र, णमोकार तीर्थ से नासिक की धार्मिक पहचान और मजबूत: उप-शीर्षक: 27 एकड़ में आकार ले रहा भव्य तीर्थ, डेढ़ वर्ष से जारी निर्माण कार्य; 108 फीट ऊँचा समवशरण श्रद्धालुओं का मुख्य आकर्षण

नासिक में 27 एकड़ में बन रहा णमोकार तीर्थ तेजी से आस्था का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। सात मंजिला 108 फीट ऊँचा समवशरण, 51 फीट की चंद्रप्रभु प्रतिमा और...

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आचार्य श्री प्रज्ञा सागर जी के सान्निध्य में हो रही पदयात्रा अलौकिक : रामगंजमंडी, भवानीमंडी एवं हाडोती के भक्तों ने कहा-अद्भुत आध्यात्मिक आनंद का पल 

आचार्य श्री प्रज्ञा सागरजी के सान्निध्य में हाडोती की चंबल नदी के तट पर बसी धर्म प्राण नगरी कोटा से स्वस्तिधाम जहाजपुर के लिए ऐतिहासिक पदयात्रा निकाली जा रही...

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श्री चंद्रप्रभु के दीक्षा तप कल्याणक पर आहार चर्या: समवशरण से दिव्य देशना हुई, भामाशाह अशोक पाटनी ने दिया प्रथम आहार

श्रीमद जिनेंद्र पंच कल्याणक समिति द्वारा सकल दिगंबर जैन समाज के सहयोग से आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन केवल ज्ञान कल्याणक पर श्री चंद्रप्रभु महामुनिराज...

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भगवान अरहनाथ जी का तप कल्याणक 30 नवंबर को : तिथि के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी को मनाया जाएगा भगवान का तप कल्याणक 

जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरहनाथ का तप कल्याणक 30 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों, चैत्यालयों में भगवान का विशेष पूजन, आराधना और विभिन्न...

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भगवान महावीर का तप कल्याणक 14 नवंबर को: तिथि के अनुसार मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी को मनाया जाता है तप कल्याणक

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का तप कल्याण 14 नवंबर को मार्गशीर्ष कृष्ण दशमी के दिन पूरे धार्मिक उल्लास और पारंपरिक भक्ति के अनुसार मनाया जाएगा।...

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ज्ञान का कार्य है जानना, श्रद्धान का काम विश्वास करना: आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सान्निध्य में मनाया ज्ञान कल्याणक 

आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी के सान्निध्य में हो रहे पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन भगवान को केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। केवल ज्ञान कल्याणक महोत्सव की बेला...

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भगवान ने द्रव्य, भाव और नौ कर्म रूप जन्म-जरा-मरण रूपी नगर को नष्ट किया — आचार्य वर्धमान सागर जी : सहस्त्रनाम विधान की पूजा में भगवान के गुणों का वर्णन

सहस्त्रनाम मंडल विधान के दौरान आचार्य वर्धमान सागर जी ने बताया कि भगवान ने द्रव्य, भाव और नौ कर्म रूप तीन पुर — जन्म, जरा और मरण रूपी नगर को नष्ट किया है। पूजन...

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भोग विलास जीवन का साध्य नहीं, त्याग संयम जीवन का ध्येय हो: मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने त्याग और संयम को प्रवचन में किया विश्लेषित 

दुनियादारी में तो हम नित्य प्रतिदिन उलझे रहते है, भगवान की शरण में आने का मौका बहूत कम मिलता है। यह बात मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने अवधपुरी में श्री सिद्धचक्र...

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भक्ति वह ताकत है जो भगवान को भी अपनी ओर खींच लेती है: शामली जैन समाज ने की भावना, विमर्श उत्सव हमारी नगरी में मनाया जाए 

जिनागम पंथ जयवंत हो और आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज के गगनभेदी जयकारों से संपूर्ण वातावरण गुंजायमान हो गया, जब धर्मनगरी शामली से पधारे दो शतक (200)...

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जो ज्ञान अभिमान पैदा करे वह ज्ञान नहीं: आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने ज्ञान और भक्ति का महत्व समझाया 

नगर में आचार्यश्री विमर्शसागर जी महाराज का चातुर्मास जारी है। मंदिर में रोजाना भगवान की भक्ति और आचार्यश्री के प्रवचनों का लाभ समाजजन ले रहे हैं। अपने नित...

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