Tag - विद्याप्रमाण गुरुकुलम

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कर्म अच्छे हो या बुरे उसका फल भोगना जरूर होता है: मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने कर्म फल की व्याख्या की 

बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे वह कितना भी अच्छा कहे खूब दान करे लेकिन, उसे कोई अच्छा नहीं कह सकता है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने...

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पुण्य की जब तक प्रबलता है कुछ अच्छे कार्य कर लें : मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने प्रवचन में पुण्य को बड़ा फलदायी बताया 

यदि पुण्य को पाप में लगाओगे तो यह पुण्य क्षीण होता चला जाएगा और जो दिख रहा है, वह भी सब हाथ से निकल जाएगा। जिस निगोद नरक से यह यात्रा प्रारंभ हुई थी फिर वहीं...

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क्षमा करने के लिए सबसे अधिक साहस जरूरी: 14 सितंबर को भोपाल जैन समाज का क्षमावाणी महोत्सव 

आज का युग ‘रिएक्शन’ का युग है, छोटी सी बात पर रिश्ते टूट जाते हैं, पोस्ट पर कमेंट्स से भावनाएं आहत हो जाती हैं। अहंकार इतनी ऊंचाई पर बैठा है कि ‘मैं गलत नहीं...

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