अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ...
Tag - मुनि श्री संभवसागरजी
संसार शरीर और भोगों से जब विरक्ति हो जाती है तो धन संपत्ति और पद से मोह समाप्त हो जाता है। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागरजी ने जैनत्व का इतिहास बताते हुए व्यक्त...
मुनिश्री संभवसागर जी ने रविवार को बच्चों से संवाद किया। उन्हें आचार्य श्री विद्यासागर जी से जुडे़ संस्मरण सुनाए। उन्होंने हिन्दी को अपनाने और हिन्दी माध्यम में...








