Tag - मुनिश्री निर्वेगसागरजी

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जब तक व्यक्ति अपने अपराध को अपराध नहीं समझेगा तब तक वह अपने आप में सुधार नहीं कर सकता-मुनिश्री प्रमाण सागरजीः कैदियों से उनकी आप बीती सुन मार्गदर्शन दिया

मुनिश्री ने कहा कि गलती करना, गलती को दोहराना और गलती से सीख लेना और गलती को सुधारना ही आप लोगों का मूल लक्ष्य होना चाहिये। पहले तो कोई गलती करो मत और यदि गलती...

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प्राप्त को पर्याप्त मानो, मन को हर स्थिति में आनंद से भरो-मुनिश्री प्रमाण सागरजीः ‘निन्यानवे का चक्कर‘ कहानी से समझाया

‘संतोष‘ सबसे बड़ा मूल मंत्र है ‘जो आपके पास है उसमें यदि आपने संतोष कर लिया तो आपसे ज्यादा खुश कोई दूसरा व्यक्ति नहीं, जो प्राप्त है उसे पर्याप्त मानो, मन को हर...

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आध्यात्म हर स्थिति में हमें स्थिरता प्रदान करता है - मुनिश्री प्रमाण सागरजी : मोदीजी की नसिया में मुनि संघ विराजमान

आध्यात्म हर स्थिति में हमें स्थिरता प्रदान करता है। संयोग-वियोग ‘कर्म की धरोहर हैं‘ कर्म कहता है तुम इसका उपयोग करो, मिस यूज मत करना। जो इस सत्य को पहचान लेता...

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वैराग्य पाठ उनसे सीखों, जिसके अंदर आत्मानुशासन होः संगम नगर में विराजमान मुनिश्री प्रमाण सागरजी

मुनिश्री ने कहा ‘आत्मविश्वास‘ और आत्म नियंत्रण आपको लौकिक जगत में भी सफलता दिलाता है और आध्यात्म को भी मजबूत करता है, जिसका अंदर से सेल्फ कान्फीडेंस मजबूत होता...

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धर्म सभा में हुए प्रवचन : संसार में सबसे सुखी व्यक्ति वही है जो इस संसार से पार हो गये – मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज

धर्मी होंने की असल पहचान यही है कि उसके अंदर सही समझ, स्थिरता, सहनशीलता तथा सकारात्मकता का गुण हो उपरोक्त उदगार अपने प्रवचन में मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज...

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