Tag - मार्दव धर्म

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अभिमान त्यागने से ही मिलता है आत्मिक सुख और शांति : अहंकार विष के समान, मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है – पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी

पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...

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मीठे वचन, झुकी हुई दृष्टि और उपकार का भाव ही सच्ची मार्दवता है: अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज- विनम्रता ही सच्चा धर्म, अहंकार ले जाता है पतन की ओर

परिवहननगर में शुक्रवार को अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज के सानिध्य में पर्युषण पर्व के दूसरे दिन मार्दव धर्म पर कार्यक्रम हुए। सुबह भगवान का अभिषेक...

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मीठे वचन, झुकी हुई दृष्टि और उपकार का भाव ही सच्ची मार्दवता है: अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने समझाया मार्दव धर्म का महत्व 

परिवहननगर में शुक्रवार को अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी महाराज के सानिध्य में पर्युषण पर्व के दूसरे दिन मार्दव धर्म पर कार्यक्रम हुए। सुबह भगवान का अभिषेक...

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सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में पर्वराज पर्युषण पर भक्ति भाव से हुए धार्मिक अनुष्ठान : आर्यिका आगममति जी का मिल रहा सानिध्य  

जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से...

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जहां मान है, वहां द्वंद्व है, जहां मार्दव है वहां शांति है: मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने मार्दव धर्म को आत्मसात करने की दी प्रेरणा 

नगर में चल रहे चातुर्मास के दौरान मुनिराजों के प्रवचन से यहां की जनता अपार धर्म प्रभावना का लाभ अर्जित कर रही है। मुनिराज श्री सर्वार्थसागर जी महाराज के प्रवचन...

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