गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अयोध्या में अपने प्रवचन में कहा कि भगवान ऋषभदेव सिंहासन पर सुख से बैठे हुए थे कि उन्होंने अपना चित्त कला और विद्याओं के...
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प्रभु ने स्त्री जाति के महत्व को इस युग में रेखांकित करते हुए मसि यानि लेखन विधा और विद्या, इन दो कलाओं का शिक्षण अपनी पुत्रियों ब्राम्ही और सुंदरी को ही दिया।...








