पट्टाचार्य विशुद्ध सागरजी ने धर्मसभा में कहा कि- आत्मा में लीनता, निज में निज की लीनता ही ब्रह्मचर्य व्रत है। आत्म ब्रह्म में लीनता ही सर्व-श्रेष्ठ है।...
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सनावद में पर्युषण पर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी बड़े भक्तिभाव के साथ मनाई गई। मुनि श्री साध्य सागर जी और मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने उत्तम ब्रह्मचर्य...








