Tag - प्रसाद सागर महाराज

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जैनधर्म में पांच परमेष्ठियों का है विशेष महत्त्व: 16 अप्रैल को कुंडलपुर में होगा आचार्य पद महोत्सव 

जैनधर्म में पांच परमेष्ठियों का विशेष महत्त्व है । पांचों परमेष्ठियों में आचार्य तीसरे नंबर के परमेष्ठी हैं। जो पंचाचार का स्वयं पालन करते हैं और शिष्यों से...

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प्रदर्शन का नहीं जिनशासन में दर्शन और अंतरदर्शन का महत्व बड़ों के आदेश को टालना नही बल्कि पालना पड़ता है

दमोह जिले का सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ कुंडलपुर में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा यह बात सच है कि मैं अपने जेष्ठ श्रेष्ठ...

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