दुनिया में पिता ही होता है, जो अपने बच्चे को बिना स्वार्थ के प्यार करता है। अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत करके सभी जिम्मेदरियों को निभाता है। इस...
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जैन धर्म और धर्मशास्त्रों के अनुसार संयम, त्याग, समर्पण और सेवा के लिए हमारे साधु-संतों की दिव्य वाणी में संदेश होता है। अब आप देखिए पिता क्या हैं? उनको...
पैबंद लगे कपड़े पहने दिन-रात मेहनत कर बच्चों की अभिलाषाओं को सिंचिंत करने का काम करने वाला माली एक पिता ही हो सकता है। ‘इस बार नहीं अगली बार ले लूंगा’ का वादा...








