Tag - नसिया जी दिगंबर जैन मंदिर

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भक्ति करना प्रभु के निकट जाने का ही माध्यम है – मुनिअपूर्व सागरजी भाव की विशुद्धि के साथ गुणवान पुरुष के गुणों को कहना ही कहलाता है भक्ति 

भगवान की स्तुति करना अनंत फलदायक होती है। भाव की विशुद्धि के साथ गुणवान पुरुष के गुणों को कहना भक्ति कहलाता है। प्रत्येक मनुष्य को स्तवन करना चाहिए। स्तवन का...

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