Tag - धरियावाद

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गुरु के सानिध्य, विनयपूर्वक अर्जित ज्ञान से शिष्य का जीवन का निर्माण होता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः शिव सागरजी का वात्सल्य कभी भूल नहीं सकते 

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी मुनिश्री पुण्य सागर एवं साधुओं सहित धरियावद विराजित हैं। आपके संघ सानिध्य में आचार्यश्री शिव सागरजी का 57वां अंतरविलय समाधि वर्ष...

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फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की सातवीं राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक: सम्मेद शिखरजी यात्रा आदि कार्यक्रम पर हुई चर्चा 

फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सातवीं गूगल मीट हुई। इसमें समाज के विभिन्न कार्यों की समीक्षा से लेकर कई नए कार्यक्रमों की प्रस्तावना...

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श्रावक-श्राविकाओं का सैलाब उमड़ा : मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज का धरियावद से करावली की ओर मंगल विहार हुआ

वात्सल्य वारिधि राष्ट्र गौरव दिगंबर जैनाचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के संघस्थ शिष्य युगल मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज, मुनि श्री अर्पित सागर जी...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : जीवन में पाप करना आसान है, पर पाप को स्वीकार करना बहुत कठिन- मुनि श्री सुदत्त सागर जी महाराज

जिन दर्शन, जिनाभिषेक, जिन पूजन, जिन भक्ति, तीर्थ यात्रा करना, आहार दान देना आदि यह कार्य पुण्यशाली और सौभाग्यशाली जीव ही कर सकते हैं। ये सब कार्य नहीं करने...

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भगवान जिनेंद्र की आज्ञा का पालन करने वाला होता है जैन: सम्यक दर्शन,सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की एकता ही है मोक्षमार्ग

वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज के शिष्य मुनि अर्पित सागर ने कहा कि जो सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र से सहित होता है, वह...

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