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स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः श्री महायशमति ने श्रावक का अर्थ प्रतिपादित किया

प्रमादमय स्त्रियों को प्रमादमय मूर्तियों की उपमा दी गई है, अर्थात स्त्रियों में हमेशा प्रमाद विद्यमान रहता है, जिस प्रकार मिट्टी की मूर्ति में मिट्टी की बहुलता...

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7 फरवरी को पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का होगा मंगल विहारः शिष्या आर्यिका श्री दिव्ययशमति ने किए केशलोच

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी सॉन्ग सहित पारसोला में विराजित है। 6 फरवरी को शिष्या आर्यिकाश्री दिव्ययशमति माताजी ने आज केशलोच किए। पारसोला नगर में आयोजनों के...

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