Tag - त्रिदिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्त संवाद

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जब तक प्राकृत भाषा जीवित है तब तक संस्कृति जीवित है : आचार्य श्री सुनीलसागर जी के सानिध्य में गिरनारजी में हुआ त्रिदिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा विद्वत्त संवाद 

जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ स्वामी की निर्वाण स्थली गिरनारजी में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य से प्राकृत भाषा के...

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