कुंद-कुंद ज्ञानपीठ, इंदौर की राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम सत्र में प्राकृत वाङ्मय, जैन आगम, योग, ध्यान, पर्यावरण और ज्योतिष जैसे विषयों पर विद्वानों ने शोधपत्र...
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मुनि श्री 108 सर्वार्थ सागर जी महाराज को उनके विशिष्ट साहित्यिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित “विशुद्ध विद्यावारिधि” उपाधि प्रदान की गई है...
रामगंजमंडी स्थित सिद्ध क्षेत्र में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। देशभर से आए...
प्राकृत भाषा, भारत की एक प्राचीन भाषा, से अनेक अन्य भारतीय भाषाओं और बोलियों का उद्भव हुआ है। इस भाषा में हजारों जैन आगम और जैन साहित्य रचित हैं, जो लगभग 2500...








