Tag - इष्टोपदेश ग्रंथ

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यात्रा कैसी भी हो यदि आधी पार हो जाए तो फिर वापस लौट पाना संभव नहीं: इष्टोपदेश के रचयिता जैनाचार्य पूज्यपाद स्वामी विलक्षण प्रतिभा के थे धनी 

नरक गति और तिर्यंच गति के भयंकर दुःखों को सहन करके हमने मनुष्य गति तक का आधे से ज्यादा रास्ता पार कर लिया है। अब इस जगह से पुनः नीचे की गतियां नहीं प्राप्त...

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अकाट्य श्रद्धा से परमात्मा बनना संभव: क्षुल्लक श्री महोदय सागर जी ने धर्मसभा में बताया श्रद्धा का महत्व 

क्षुल्लक द्वय श्री महोदय सागर जी, क्षुल्लक श्री पुण्योदय सागर जी महाराज ससंघ सान्निध्य में प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का जलाभिषेक पंचामृत अभिषेक, महा शांतिधारा...

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