Tag - आचार्य श्री विमर्श सागर

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मनुष्य का जीवन पानी की बूंद की तरह : जैन धर्म प्राकृतिक धर्म है – आचार्य विमर्श सागर

बिरले जीव होते हैं वह बूंद की तरह जन्म लेकर ऐसा महान पुरुषार्थ करते हैं कि बूंद को सागर की तरह बना लेते हैं। शेष लोग तो बूंद से जीवन को मिटाकर नई बूंद की तलाश...

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थेम्स यूनिवर्सटी, फ्रांस ने दिया अलंकरण : दिगंबराचार्य विमर्श सागर को डी. लिट. की उपाधि से अलंकृत किया

थेम्स यूनीवर्सटी फ्रांस द्वारा डी.लिट. की उपाधि एवं ग्लोबल भक्तामर ग्रुप द्वारा साहित्य मनीषी अलंकरण से आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज को अलंकृत किया गया।...

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10 वर्ष बाद पहुंचे आगरा की पावन धरा पर : श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ससंघ का छीपीटोला में भव्य मंगल प्रवेश

आचार्यश्री विमर्शसागर जी महाराज अपने 25 पिच्छिकाओं एवं आगरा नगर की दो गौरव आर्यिकाश्री विघांतश्री माताजी एवं आर्यिकाश्री विमलाश्री माताजी सहित 10 वर्षों के बाद...

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धर्म प्रभावना: दया धर्म का पालन करना सिखाता है जैन धर्म : आचार्य श्री विमर्श सागर

बकस्वाहा के पारसनाथ जैन मंदिर परिसर में आयोजित धर्मसभा में ‘ जीवन है पानी की बूंद ‘ महाकाव्य के मूल रचयिता, बुंदेलखण्ड गौरव, भावलिंगी संत...

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