Tag - आचार्य विनिश्चयसागर जी

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धर्म और आत्मा का असली स्पर्श तब होता है, जब मनुष्य भीतर से बदलने को तैयार होता है : चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से न जाए – आचार्य विनिश्चयसागर

रामगंजमंडी में आयोजित जैन धर्मसभा में आचार्य श्री विनिश्चयसागर जी ने मनुष्य के आचरण और मूल्यों को केंद्र में रखकर संयम और सच्चाई की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने...

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सोने चांदी के बर्तनों में पूजा करने से आस्था नहीं बनती-आचार्य विनिश्चयसागर जी: आस्था को मजबूत बनाने पर दिया आचार्यश्री ने जोर 

सांसारिक जीव की आस्था कहीं ना कहीं होती है। अंतर इतना है कि मिथ्यात्व पर होती है या सम्यक पर होती है। विश्वास तो करना ही पड़़ता है। कुदेव पर करलें, चाहे सच्चे...

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