Tag - आचार्य विनिश्चयसागर

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पर्वत पर कुंदप्रभ कूट पर हुआ शांति विधान : आचार्य विनिश्चयसागर के सान्निध्य में श्रीशिखर जी में चढ़ाया गया निर्वाण लाडू

श्री सम्मेद शिखरजी पर्वत की वंदना से लौटने के पश्चात वरुण वैवरेज प्रा. लि. कंपनी के एग्जीक्युटिव डायरेक्टर सीए कमलेश जैन गुरुग्राम ने बताया कि गणाचार्य श्री...

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आत्मा निराकार हैं, शरीर से ज्यादा फिक्र आत्मा की करें: आचार्य विनिश्चयसागर ने आत्मा का सार बताया 

बहुत से लोगों को जिज्ञासा रहती है कि इस शरीर के अंदर कौन रहता है। बहुत कोशिश की गई, बहुत खोज की गई। बड़े बड़े वैज्ञानिकों ने इसका समाधान पाने के लिए बहुत शोध...

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आचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज की धर्मसभा : बिना शुद्ध भावो के सुख की चाह व्यर्थ है

प्रत्येक मनुष्य के मन में एक प्रश्न रहता है कि भगवान से कुछ मांगना चाहिए या नहीं मांगना चाहिए। इस संबंध में जिनागम तो सीधा सा उत्तर देता है कि क्या सूर्य से...

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चंदप्रभु भगवान का हुआ महामस्तकाभिषेक : आचार्य विनिश्चयसागर का मिला सान्निध्य

जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु का महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम आचार्यश्री के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। वाक्केशरी आचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराजा ससंघ का...

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मुनिश्री प्रतीकसागर ने श्रावकों को संगठित होने का दिया आदेश : दिगम्बर संत जन-जन की आस्था के केंद्र होते हैं -आचार्य विनिश्चयसागर

शास्त्रों में भी अनेकों उदाहरण मिलते हैं कि समय-समय पर अन्य संप्रदाय के लोगों ने भी दिगम्बर साधुओं की सुरक्षा की है। आज भारत जैसे धर्म निरपेक्ष देश में एक...

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बिना बोली लगाए गुरु भक्तों ने की मंगल कलश स्थापना : कलश साधु और श्रावक के बीच सेतु का काम करता है – आचार्य विनिश्चयसागर

चातुर्मास में कलश वह माध्यम है, जिससे श्रावक अपने आपको चातुर्मास से जुड़ा हुआ महसूस करता है। यह विचार आचार्य श्रीविनिश्चयसागर जी महाराज ने चातुर्मास कलश...

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धर्मसभा को संबोधित कर व्यक्त किए उदगार : सोचो नहीं, सोच बदलो तो बदलेगा जीवन – आचार्य विनिश्चयसागर

जो आज तक किया है अब नहीं करेंगे और जो नहीं किया है वो अब करेंगे। ऐसी विचारधारा जब आपकी अंतस चेतना में आयेगी, तब आप कुछ सुखी हो सकते हैं। उक्त उद्बोधन आचार्य...

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चातुर्मास के दौरान धर्मसभा में प्रवचन : मनुष्य पर्याय चिंतामणि रत्न के समान हैं -आचार्य विनिश्चयसागर

मनुष्य पर्याय से बढ़कर कोई सौभाग्य नहीं हैं, ये सबसे बड़ा सौभाग्य हैं जो आपको प्राप्त हुआ है। आप इसे महसूस करें तभी आप मानव पर्याय की महत्त्वता समझ सकेंगे।...

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