मैं जब अपने से बड़ों से मिलता हूं तो क्षीर में नीर की तरह मिलने का प्रयास करता हूं और अपने से छोटों से मिलता हूं तो उन्हें अपने में मिलाने का प्रयास करता हूं...
Tag - आचार्य प्रज्ञा सागरजी
हम नित नए निर्माण तो करते जा रहे है, पर प्राचीन पूरा वैभव की ओर किसी का ध्यान नहीं है। प्राचीन तीर्थ क्षेत्रों की प्राचीनता पावनता, भव्यता, पुरातत्वता ज्यों की...








