आचार्य वर्धमान सागर जी ने टोंक चातुर्मास प्रवचन में कहा कि साधु का जीवन आगम अनुसार होना चाहिए। समाज को संगठित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रथमाचार्य...
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धरियावद स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु जिनालय में मुकुट सप्तमी के अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ के निर्वाण महोत्सव पर कृत्रिम सम्मेद शिखरजी की रचना में भगवान के पाषाण...
टोंक नगर में पंचम पट्टाधीश आचार्य वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूजन, आहार और अभिषेक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विधिपूर्वक...








