बड़वाह से सिद्धवरकूट विहार कर रहे अंतर्मुखी मुनि श्रीपूज्य सागरजी महाराज के रास्ते में श्रावकों द्वारा पाद प्रक्षालन किया गया, तो उसी थाली में मुनिश्री के चरण...
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भगवान आदिनाथ ने जीवन में पुरुषार्थ करने और विभिन्न विद्याओं व कलाओं के माध्यम से जीवन को व्यवस्थित ढंग से जीने का उपदेश दिया। भगवान आदिनाथ की जयंती पर पढ़िए...
प्रकृति के अनुसार रहना ही मुनि दीक्षा धर्म प्रभावना और आत्म कल्याण से मोक्ष का द्वार है दीक्षा जैन धर्म में संन्यास को दीक्षा कहा है। पुरुष की दीक्षा में तीन...
लेखक -अंतर्मखी मुनि पूज्य सागर जैन धर्म की कठिन तपस्या का एक अनिवार्य हिस्सा और मूलगुण है केशलोंच। जैन साधु अपने आत्मसौंदर्य को बढ़ाने के लिए...
जो बहुत धन, विद्या तथा ऐश्वर्य को पाकर भी इठलाता नहीं है, वही सच्चा पंडित कहा जाता है।
जो व्यक्ति अपने मन को काबू में नहीं रख पाता, वह कभी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता।
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आलेख- अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज








