Tag - महावीर स्वामी

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श्री शांति सागरजी ने धर्म, जिनालय, जिनवाणी, संस्कृति की रक्षा हेतु महान कार्य कियाः जैन धर्म अनादि निधन धर्म है 

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज का 33 साधु सहित धर्म नगरी प्रतापगढ़ में एक अप्रैल को भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जूना मंदिर में आयोजित धर्मसभा में आचार्यश्री ने...

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सामर्थ्य अनुसार साधु-संतों को आहारदान अवश्य करेंः दान में सबसे ज्यादा महत्व आहारदान का है-मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज 

अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रतिदिन आदिनाथ पुराण का वाचन हो रहा है। मुनिश्री पूज्य सागरजी महाराज ने आहारदान के विषय पर अपना ध्यान...

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आदिनाथ और महावीर स्वामी की प्रतिमा पर अद्भुत अद्वितीय शिल्प: एक ही प्रस्तर पर कल्पनातीत चमत्कार 

मूर्तिकला, भारतीय स्थापत्य कला के बारे में जितना गहराई से विवेचन करेंगे तो उतना ही यह हमें चमत्कृत करने के लिए विवश करती है। भारत की सरजमीं पर शिल्पकारों ने...

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Life Management-36 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : मस्तिष्क का विज्ञान-भगवान महावीर की दृष्टि में

डॉ. विनोद शर्मा अपनी पुस्तक मस्तिष्क विज्ञान और पढाई आसान में कहते है-‘हमारे दिमाग का सबसे महत्वपूर्ण काम है सूचनाओ को सही तरीके से एकत्रित करना और जरूरत पड़ने...

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Life Management-35 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : पहले तोलो, फिर बोलो-भगवान महावीर की दृष्टि में

शब्दों का प्रयोग करने से पहले उसे मन के तराजू में तोल लेना चाहिए। यदि वह शब्द आपको अच्छे लगते हैं तभी वह दूसरों को प्रभावित कर पाएंगे, यदि आपको वह शब्द कड़वे...

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Life Management-34 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शब्द की ताकत शस्त्र से ज्यादा होती है-भगवान महावीर की दृष्टि में

शब्द के बगैर मानव गूंगा ही है साथ ही बेकार और आधारहीन है। मुनि विनय कुमार आलोक कहते है-‘शब्दों की ताकत, तलवार और गोली की ताकत से भी अधिक होती है। शब्दों के...

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Life Management-33 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : अधिक बोलना उथलापन है- भगवान महावीर की दृष्टि में

सभी व्यक्तियों का स्वभाव अलग-अलग होता है। हम किसी की तुलना किसी से नहीं कर सकते। परंतु बोलने के संदर्भ में हम यह अवश्य कह सकते हैं कि किसी को भी हम टका-सा जवाब...

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Life Management-32 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें: वचन संयम, मौन अभ्यास-भगवान महावीर की दृष्टि में

वर्तमान युग में हम सभी को कभी न कभी गुस्सा आता ही है और जब हमें गुस्सा आता है तो क्या होता है ? उस समय होता यह हैं कि हमारा स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता और हमें...

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Life Management 31 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शतपदगामी वामपार्श्वशायी – भगवान महावीर की दृष्टि में

हमारी यानि विशेषकर शहरी लोगों की डाईट खराब होती जा रही है। क्योंकि डाईट में मैदा, प्रोसेस्ड फूड, फास्ट फूड और मसालेदार चीजों को खाने का चलन बहुत अधिक बढ़ता चला...

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Life Management 30 जीवन का प्रबंधन-यत्न पूर्वक चेष्टा करें : शाकभुक् – शाकाहारी भोजन – भगवान महावीर की दृष्टि में

शाकाहारी भोजन करने का अर्थ यह हैं कि शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाना चाहिये। इसे हम यू भी समझ सकते हैं कि किसी भी जीव जिसमें जीवन का अंश हो उसे रंच मात्र भी...

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