रचयिता – गौतमचन्द ओस्तवाल ” धर्म रत्न विषारद
प्रधान संपादक-“मोक्षद्वार” पत्रिका, बेंगलुरु (कर्नाटक)
[तर्ज- श्री महावीर भगवान, तुमको लाखों प्रणाम…… ।जिनशासन की शान, तुमको लाखों प्रणाम !
जैन जगत विद्वान, तुमको लाखों प्रणाम ।। टेर् ।।
श्री चन्द्रराज के नन्दन प्यारे, माता श्रीकांते नमन दुलारे।
श्री रत्नवर्मा नाम, तुमको लाखों प्रणाम ।।1।।
सिद्ध क्षेत्र वारंगा जनम्यां, तीन मई उन्नीसो उनपचास चमक्या।
श्री जैन मठ प्रमुख, तुमको लाखों प्रणाम ।।2।।
कोई पूत पग पालणे पिछाण्या, सौलह वर्ष में दुमचा पढ़ाया।
कोई बुद्धि में तेज तर्रार, तुमको लाखों प्रणाम ।।3।।
श्रवणबेलगोला भट्टारक की नयन निरखी, श्री भट्टाकलंक स्वामी ने पारख परखी।
देख हस्त रेख प्रमाण, तुमको लाखों प्रणाम ।।4।।
शारीरिक लक्षण देख बुद्धि परीक्षण, स्वाध्याय ज्ञान जान निरीक्षण।
त्या कुल निर्दोष महान्, तुमको लाखों प्रणाम ।।5।।
मन निर्दोष आचरण आयु, परखा निरखा मनने मायुं ।
दिगम्बर मठ के प्राण, तुमको लाखों प्रणाम।।6।।
महाकलंक जी ने होनहार परखा, पाया जान रतन अनमोला।
किया “भावी भट्टारक” चयन, तुमको लाखों प्रणाम ।।7।।
“श्रवणबेलगोला” का भाग्य सवाया, जैन मठ सरताज संभलाया।
घोषित “भट्टारकजी” तुमको लाखों प्रणाम ।।8।।
श्री चारुकीर्ति नाम दीपाया, बारह दिसम्बर उन्नी सौ उनसितर आया।
दिया कर्नाटक शासन ने भी मान, तुमको लाखों प्रणाम 11911
चार माह बाद किया अनुमोदन, प्रथम पट्टाभिषेक गुण अभिनन्दन।
उन्नीस अप्रैल सन् सितर, तुमको लाखों प्रणाम।।10।।
श्री शंकर महावीर शुभ जन्म कल्याणक, गुरुवर द्वारा नियुक्त कर अभिषेकम्
ऐसे परम विद्वान, तुमको लाखों प्रणाम ।।11।।
देश-विदेश में धर्म फैलाया, खूब प्रचार कर जिनधर्म दीपाया।
सिंगापुर- अमेरिका आदि जान, तुमको लाखों प्रणाम ।।12।।
भाषा कन्नड हिन्दी अंग्रेजी सीखी, संस्कृत-प्राकृत के बने पारखी।
हुए उद्भट्ट विद्वान, तुमको लाखों प्रणाम ।।13।।
जिनधर्म की ध्वजा फहराई, दिगम्बर शासन दिया चमकाई।
ऐसे सरलमना भट्टारक, तुमको लाखों प्रणाम ।।14।।
सन् 981 में बाहुबली प्रतिमा उद्घाटित, सन् 1981 में 1000 वर्ष पूर्ण प्रतिष्ठित
बारह वर्षीय मस्तकाभिषेक, तुमको लाखों प्रणाम ।।15।।
1981 में महामस्तकाभिषेक कराया, सून् 1993 में फिर दोहराया।
सन् 2006 में चमके महान, तुमको लाखों प्रणाम ।।16।।
सन् 2018 में महामस्तकाभिषेक कराया, देश प्रधाने नगरे आया।
“कर्मयोगी “श्री स्वस्ति महान्, तुमको लाखों प्रणाम ।।17।।
वय 74 वर्ष है पाया, प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त आया।
23 मार्च सन् 23 को स्वर्ग सिधाये, तुमको लाखों प्रणाम ।।18।।
आगम कीर्ति तस, शिष्य बनाया, श्रवणबेलगोला नाम चमकाया।
जैन मठ महासंत, तुमको लाखों प्रणाम ।।19।।
27 मार्च को पट्टधर बनाया, पट्टाभिषेक कर भार संभलाया।
“गौतम” के श्रद्धास्पद, तुमको लाखों प्रणाम ।।20।।













Add Comment