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सबकुछ पूज्य को समर्पित कर दो तुम भी पूज्य बन जाओगेः मुनिश्री सुधासागरजी के प्रवचनों में दिख रहा जीवन का सत्य


मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के प्रवचन स्थानीय जैन मंदिर में रोजाना हो रहे हैं। इसमें समाजजनों की उपस्थित बड़ी संख्या में रहती है। वे अपने प्रबोधन में जैन समाज के लिए बहुत अहम धर्म, कर्म और संस्कृति के संदेश दे रहे हैं। पढ़िए सागर से राजीव सिंघई की यह खबर…


सागर। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज स्थानीय जैन मंदिर में अपने नित प्रबोधन में जैन समाज के लिए बहुत अहम संदेश प्रदान कर रहे हैं। अगर मुनिश्री के संदेशों पर अमल कर लिया जाए तो जीवन में मंगल ही मंगल होगा। प्रवचन के दौरान मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के दिव्य वचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग जमा रहते हैं। बुधवार को उन्होंने प्रवचन के दौरान कहा कि संसार में शुद्ध होना यदि सरल होता तो सब बन गए होते और यदि असंभव होता तो कोई प्रयास ही नहीं करता। बुराइयों का मार्ग सरल है, अच्छाइयों का मार्ग कठिन है। बुराई कब आ जाती है जिंदगी में पता नहीं चलता और अच्छाई लाने के लिए मां-बाप, गुरु, शास्त्र, पुराण, यहां तक की भगवान को भी लगना पड़ता है किसी को अच्छा बनाने के लिए। कितनी शक्तियां लगती हैं तब कहीं व्यक्ति अच्छा बन पाता है और बुराई लाने के लिए कोई नहीं लगता, फिर भी बुराई आ जाती है।

संगति करते समय ध्यान रखें

अपने से बड़े वालों की संगति कम किया करो, यदि तुम गरीब हो और अमीर आदमी की संगति में दो-चार दिन रुक गए तो या तो सुसाइड कर लोगे या चिड़चिड़ापने का शिकार हो जाओगे क्योंकि, उसका ठाठ वैभव देखकर 90 प्रतिशत इस मन में अपने से आगे जाने वाले के प्रति ईष्याभाव या हीन भाव होता है। ईष्यालु व्यक्ति जिसके पास है उसको बद् दुुआ देगा और जो उसके पक्ष में मिलता है, भगवान को भी निपटा देगा लेकिन, दूसरा वह अपने आप को इतना कोसेगा कि अपनी बद्दुआ स्वयं को लग जाएगी और मिट जाएगा, मैं जन्म जन्म का पापी हूं। ये कोई जिंदगी है क्या, इससे अच्छा है कि मर जाऊँ, इसलिए तुम्हारे लिए आदेश है कि तुम अपने से बड़े वाले को देखना नहीं, उसकी संगति में जाना नहीं, उससे छोटे वाले के पास जाओ, तुम्हारा प्रोमोशन हो जाएगा। अपने से ज्यादा दुखी को देखने से दुख को सहन करने की शक्ति आ जाती है कि इससे अच्छा तो मैं हूं।

पद दलित माटी मंगल कलश बन जाती है

बुरे लोग जब अच्छे बन जाए उनकी बुराइयों का ज्ञान जरूर रखना क्योंकि, आज वो महान बन गया। इससे पूर्व दशा में वो क्या था ये जानने से बहुत बड़ा लाभ होता है, हौसले बुलंद होते हैं। देखो यह कहां था और कहां पहुंच गया, जो हतोत्साहित हो गए हैं उनका बल बढ़ता है। आपको जीने का मन हो जाएगा, आप कुछ भी नहीं करते हैं तो आप कहेंगे कि एक णमोकार मंत्र की माला तो फेरूंगा। जिसको णमोकार मंत्र नहीं आता उसको सिद्ध हो गई तो मुझे तो णमोकार मंत्र आता, अपन तो बहुत कदम आगे है। अच्छे व्यक्तियों के बुरे दिन, संकटों के दिन याद करो, इसलिए आचार्य श्री ने उपदेश देने के लिए फूल को नहीं, पददलित माटी को चुना, जो पैरों से रौंदी जाती है। जब पद दलित माटी मंगल कलश बन जाती है। तब हे मानव तू तो पददलित नहीं है, उसको देखकर के भाव जागता है।

संकट का निवारण हो तो आप उसका स्मरण कीजिए

आप संकट में हैं, परेशानी में हैं, आप चाहते हैं कि मेरे संकट का निवारण हो तो आप उसका स्मरण कीजिए। जिसने सबसे ज्यादा जिंदगी संकट में निकाली हो, बस उसका ध्यान कर लीजिए, आप संकट से मुक्ति पा जाएंगे।

उनके नाम से ही काम हो जाता है

हे भगवान मुझे ऐसा आशीर्वाद दो कि जब मैं चलूं तो रास्ते में कांटे मिले और जब पैर रखूं तो वह फूल बन जाए। दुनिया के भगवान तो संकट दूर करने आते हैं और जिनेंद्र भगवान का भक्त कहता है कि मेरे भगवान को आने की जरूरत नहीं है। उनके नाम से ही काम हो जाता है। श्रीराम संकट की स्थिति में थे और इन्होंने कहा कि मेरे बड़ों को सूचना मत देना, बोले नहीं मैं अपने से बड़ों को सुख नहीं दे सकता तो मैं उन्हें अपने दुःख में दुःखी भी नहीं कर सकता।

मैं मां-बाप के लिए हूं यह भाव रखें

वस्तु को देखते ही यह भाव आना कि यह वस्तु मेरे काम की है, ये जो नीति है, ये पग-पग पर हमारी शक्तियों को तिरोहित करती है, हमारे स्वयं की शक्तियां समाप्त हो जाती है और हम पराधीन हो जाते हैं। किसी कार्य के प्रारंभ में हमेशा तीन चीजों से बचना- नियत से, दूसरा किस्मत और तीसरा भगवान भरोसे मत रहना। जो मां-बाप की वंदना, आदर किए बिना मंदिर आते हैं। उनकी पूजा निष्फल होती है। मां-बाप मेरे लिए नहीं, मैं मां-बाप के लिए हूं, बस आज से शुरू कर दीजिए 24 घंटे के अंदर आप मंदिर को लेट हो जाएंगे लेकिन, मां- बाप की वंदना किए बिना आप नहीं रहेंगे, आप तड़प जाएंगे।

घर ही मंदिर बन जाएगा

यदि तुम कहोगे कि मैं बच्चों के लिए कमा रहा हूं तो बच्चे कहेंगे कि लाओ इधर सब, वो मालिक हो गए, इसलिए आज से पैटर्न बदलो-मैं बच्चों के लिए नहीं अपने मां-बाप के लिए कमा रहा हूं तो बेटा भी कहेगा कि मैं भी अपने मां-बाप के लिए कमाऊंगा, वो सब कुछ तुम्हें समर्पित कर देगा, उस घर में मंदिर आने की जरूरत नहीं पड़ेगी, उसका घर ही मंदिर बन जाएगा। अपने घर को, धन को, रोटी को पूज्य बनाओ और पूज्य बनने का एक ही तरीका है तुम पूज्य बन पाओ या न बन पाओ, सब कुछ पूज्य को समर्पित कर दो तो तुम भी एक दिन पूज्य बन जाओगे।

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