जिले की सीमा पर स्थित खनियाधाना में मुनि श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य हो रहे श्री मद् जिनेंद्र पंच कल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में नगर के जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने भाग लिया और मुनि श्री को श्रीफल भेंट किया। अशोकनगर से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
अशोक नगर। जिले की सीमा पर स्थित खनियाधाना में मुनि श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य हो रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में नगर के जैन समाज के प्रतिनिधि मंडल ने भाग लिया और मुनि श्री को श्रीफल भेंट किया। इस दौरान विश्व शांति महायज्ञ में सवा करोड़ मंत्रों के साथ सौधर्म इंद्र इंसान सनत कुमार, महेंद्र इंद्र, कुबेर इंद्र महाज्ञय नायकों ने प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश के मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां समर्पित की। जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि पिछले सात दिनों से चल रहे श्री मद्जिनेंद्र पंच कल्याणक महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ गजरथ महोत्सव में हम सब भाग लेकर अपने पुण्य को बढ़ा रहे हैं। प्रतिष्ठा महोत्सव में हमारे ज़िले के बगला चौराहे पर नव निर्मित मंदिर में विशाल भगवान पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। जिसकी प्रतिष्ठा इस महोत्सव में हो रही है।
मंगलवार को अशोक नगर,मुंगावली, शाढ़ौरा, पिपरई, चंदेरी, ईसागढ़, कदवया सहित पूरे जिले से बड़ी संख्या में भक्त आए हैं और सभी इस विश्व शांति महायज्ञ में अपनी भक्ति समर्पित कर रहे हैं।
यह समाजजन मौजूद रहे
इस दौरान जैन समाज के महामंत्री राकेश अमरोद, विपिन सिंघई, शैलेंद्र दद्दा, हेमंत टडैया, मनोज लल्ला, सौरव बांझल, सुनील मामा जैन, युवा वर्ग से सचिन एनएस, रीनू जैन, राहुल खजूरिया, शालू, भारत, आलोक रानीपुर, गोलू बांझल, मोनू जैन सीमेंट, ओपी धुर्रा, अनिल जैन, विनोद विजयपुरा, सहित अन्य भक्त विशेष रूप से उपस्थित थे।
मुंगावली सेवादल ने किया दिव्य घोष
जिले का सबसे पुराना सेवादल श्री दिगंबर जैन वीर सेवादल का दिव्य घोष सभी के आकर्षण का केंद्र बना था। मुंगावली सेवादल को गजरथ के आगे एवं मुनि श्री सुधासागरजी महाराज के समक्ष भी वादन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान सेवादल के चंद्रकुमार मोदी, अरविंद जैन मक्कू, अशोक सर्राफ, काली मोदी, मुकेश जैन सहित पूरे दल ने बैंड बजाते हुए तीन परिक्रमा करते हुए जयघोष किया।
श्रोता वक्ता के अनुभव सुन अपने जीवन में उतारना चाहते हैं
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि विश्वशांति महायज्ञ में जो मंत्रों के साथ आहुतियां समर्पित की जाती है। इससे वातावरण शुद्ध तो होता ही है पर्यावरण को सभी तरह से स्वच्छ बनाना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि प्रथम तो वक्त के समाने बैठकर उसके अनुभव सुनना चाहत हैं। उसके ज्ञान को मापना चाहते हैं। सुनने की शक्ति तो सभी में है। बोलने की शक्ति सभी के पास नहीं होती है। यदि हमसे कुछ थोड़ा अधिक है तो वह जानना चाहते हैं कि इसमें ये विशेषता कहां से आई? समवशरण कि विशेषता है कि यदि किसी को जिज्ञासा हुई तो उसका समाधान तत्काल होता है। भगवान महावीर स्वामी की दिव्य ध्वनि 66 दिनों तक नहीं खिरी। किसी के मन में कोई प्रश्न ही नहीं उठा तो समस्या का समाधान तो अपने आप हो जाता है। भगवान का नाम लेते ही सब समस्याओ का समाधान होते चला जाता है।













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