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भगवान आदिनाथ की पुरा महत्व की मूर्तियां देश में उपलब्ध : बावनगजा में है विश्व प्रसिद्ध आदिनाथ जी की प्रतिमा


जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जिनका जन्मोत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की नवमी 23 मार्च रविवार को आ रही है। यह जन्मोत्सव संपूर्ण विश्व में मनाया जा रहा है। इसके ठीक 18 दिनों बाद जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। इंदौर से पढ़िए ओम कीर्ति पाटोदी की यह खबर…


इंदौर। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ जिनका जन्मोत्सव चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की नवमी 23 मार्च रविवार को आ रही है। यह जन्मोत्सव संपूर्ण विश्व में मनाया जा रहा है। इसके ठीक 18 दिनों बाद जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा। पुरातत्व के महत्व की दृष्टि से देखते हैं तो भगवान आदिनाथ की अति प्राचीन दुर्लभ प्रतिमा देश में विद्यमान है। वहीं विदेशी संग्रहालयों में भी सैकड़ों जिन प्रतिमाएं संरक्षित हैं। भगवान श्री आदिनाथ भारत वर्ष के महत्वपूर्ण महापुरुष हुए हैं, जिनके बगैर भारतीय संस्कृति और इतिहास कल्पना नहीं की जा सकती। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि देश में भगवान आदिनाथ स्वामी (ऋषभदेव) की विशाल एवं प्राचीन प्रतिमाओं की बात करें तो इसमें हमारे निकट ही बड़वानी जिले का बावनगजा एक महत्वपूर्ण स्थान है। जहां पर अति प्राचीन आदि जिन प्रतिमा मौजूद हैं। जिसकी ऊंचाई बावनगज अर्थात 84 फीट है। सर्वांग सुंदर यह प्रतिमा अत्यंत मनोहारी है। यह प्रतिमा सतपुड़ा की पहाड़ी श्रंखला में मनमोहक प्राकृतिक वादियों में पहाड़ी को काटकर बनाई गई है। यह स्थान सिद्ध क्षेत्र है क्योंकि, यहां से इंद्रजीत और कुंभकरण मुनि मोक्ष गए थे। जिसका उल्लेख प्राकृत की निर्वाण कांड की गाथा में मिलता है। इस आधार पर इस स्थान का संबंध रामायण काल से जुड़ जाता है।

बदनावर में भी प्राप्त हुई प्रतिमाएं

यहां पर दर्जनों जैन मंदिर हैं। जिसमें सैकड़ों जिन प्रतिमाएं विराजमान हैं। प्राचीन प्रतिमाओं पर लेख उपलब्ध नहीं है परन्तु यहां की लेख युक्त प्रतिमाएं भी उपलब्ध है जिससे हजार वर्ष प्राचीन इतिहास जानकारियां मिलती है। इंदौर के निकट धार जिले का बदनावर (वर्द्धमानपुर) नगर भी पुरा महत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नगर है। यहां से भगवान आदिनाथ स्वामी की कई प्राचीन प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। जिसमें जवाहर मार्ग स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं मालीपुरा स्थित भोयरावाला मंदिर में भगवान आदिनाथ की हजारों वर्ष प्राचीन प्रतिमा विराजमान है। इसके अलावा भूगर्भ से प्राप्त भगवान आदिनाथ स्वामी की एक महत्वपूर्ण प्रतिमा धार नगर दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान हैं। वहीं उज्जैन के जयसिंहपुरा में स्थित जैन संग्रहालय में भी बदनावर वर्द्धमानपुर से प्राप्त भगवान आदिनाथ स्वामी की लेख युक्त प्रतिमाएं संग्रहित हैं।

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