जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पलवल से पढ़िए, यह खबर…
पलवल। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, आदिपुरुष और मानव सभ्यता को व्यवस्थित जीवन की दिशा देने वाले भगवान आदिनाथ के पावन जन्मकल्याणक के अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल (हरियाणा) में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर तीर्थ परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण भक्ति तथा धर्ममय भावनाओं से ओतप्रोत दिखाई दिया। जन्म कल्याणक के इस पावन अवसर पर तीर्थ परिसर में विराजमान भूगर्भ से अवतरित आदि ब्रह्मा श्री आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का विधिवत मंगल अभिषेक श्रद्धालुओं द्वारा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न किया गया। शुद्ध जल और पवित्र द्रव्यों से सम्पन्न इस अभिषेक के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए मंगलमय प्रार्थनाएँ कीं। अभिषेक के समय मंदिर परिसर में भक्ति की अनूठी अनुभूति देखने को मिली और श्रद्धालुओं के हृदय भगवान के प्रति समर्पण और श्रद्धा से भर उठे।
दिव्य शिक्षाएं मानव समाज को सत्य, अहिंसा, संयम की प्रेरणा
अभिषेक के उपरांत भगवान आदिनाथ के चरणों में शांतिधारा का पावन अनुष्ठान भी अत्यंत विधिपूर्वक किया गया। शांतिधारा के माध्यम से समस्त विश्व में शांति, करुणा, सद्भाव और धर्म के प्रसार की मंगल कामना की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान से प्रार्थना की कि उनकी दिव्य शिक्षाएं मानव समाज को सत्य, अहिंसा, संयम और आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहें। जैन परंपरा के अनुसार भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) केवल जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ही नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के प्रथम प्रवर्तक भी माने जाते हैं। प्राचीन ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि आदिनाथ भगवान ने उस समय मानव समाज को जीवन की मूलभूत व्यवस्थाएँ सिखाईं जब समाज असंगठित और अव्यवस्थित अवस्था में था। उन्होंने मानव को कृषि करना, व्यापार करना, लिपि और गणना का ज्ञान, कला और शिल्प की विधाएँ तथा सामाजिक जीवन की मर्यादाएं सिखाकर सभ्यता को संगठित रूप प्रदान किया।
आध्यात्मिकता की नई ऊर्जा का संचार किया
इतना ही नहीं, भगवान आदिनाथ ने मानव समाज को यह भी सिखाया कि सच्चा सुख बाहरी भौतिक वैभव में नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप और आध्यात्मिक उन्नति में निहित है। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मकल्याण का महान संदेश देता है। यही कारण है कि जैन समाज में उनका जन्मकल्याणक अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज के इस पावन अवसर पर जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम, पलवल में सम्पन्न हुए अभिषेक और शांतिधारा कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं के हृदय में धर्म, आस्था और आध्यात्मिकता की नई ऊर्जा का संचार किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान आदिनाथ के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और समाज में अहिंसा, सत्य, संयम तथा नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया।
संयम और करुणा के सिद्धांतों को अपनाया जाए
भगवान आदिनाथ के जन्मकल्याणक का यह पावन पर्व हमें यह स्मरण कराता है कि यदि मानव जीवन में धर्म, संयम और करुणा के सिद्धांतों को अपनाया जाए तो समाज में शांति, समरसता और सद्भाव की स्थापना संभव है। इसी संदेश के साथ जैन तीर्थ श्री पार्श्व पद्मावती धाम में मनाया गया यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक जागरण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।













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