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उत्तम धर्म पर हुई भगवान की आराधना : बुरा बोलने से वास्तु दोष होता है- आचार्य पुलक सागर 


पर्युषण पर्व के उपलक्ष में चल रहे शिविर में दिगंबर जैन दशा नरसिंह पूरा समाज के भट्टारक यश कीर्ति गुरुकुल सभागार में आज पांचवे दिन राजकीय अतिथि गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम सत्य पर्व मनाया गया। श्री दिगम्बर जैन समाज और पुलक मंच सदस्य राकेश कुमार वानावत और हेमंत कुमार अकोत ने बताया कि गुरुकुल प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर में शिविरार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक संगीतकार उमेश जैन के भक्तिमय माहौल में पूजा- अर्चना एवं महा शांतिधारा कर परिवार के सुख की कामना की। पढ़िए सचिन गंगावत की रिपोर्ट…


ऋषभदेव। पर्युषण पर्व के उपलक्ष में चल रहे शिविर में दिगंबर जैन दशा नरसिंह पूरा समाज के भट्टारक यश कीर्ति गुरुकुल सभागार में आज पांचवे दिन राजकीय अतिथि गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी के सानिध्य में उत्तम सत्य पर्व मनाया गया। श्री दिगम्बर जैन समाज और पुलक मंच सदस्य राकेश कुमार वानावत और हेमंत कुमार अकोत ने बताया कि गुरुकुल प्रांगण में चल रहे दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर में शिविरार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक संगीतकार उमेश जैन के भक्तिमय माहौल में पूजा- अर्चना एवं महा शांतिधारा कर परिवार के सुख की कामना की।

आज के राजा भरत चक्रवर्ती एवं महाशांतिधारा करने का सौभाग्य मंजू अशोक गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ। श्री दिगंबर जैन तीर्थ रक्षा कमेटी के उपाध्यक्ष पवन कुमार गंगावत एवं कमेटी के सदस्य पवन कुमार शाह ने बताया कि सांयकाल में बड़े मंदिर जी में ऊपर व नीचे दोनों वेदियों पर सातिया मंडप भरा जाता है। सुबह हुमड़ समाज द्वारा नेमीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं एवं सकल जैन समाज शांतिनाथ मंदिर में भक्तिभाव से समाजजन पूजा अर्चना करते हैं। सांयकाल में हुमड समाज की तरफ से शास्त्र स्वाध्याय किया जाता है।

पुलक मंच के ख्याति प्राप्त कवि बलवंत बल्लू ने बताया कि गुरुकुल सभागार में चल रहे शिविर में भगवान पार्श्वनाथ पर सुमेश वानावत एवं पुष्पदंत भवरा ने अभिषेक किया। सभी शिविरार्थियों ने भक्तिभाव से पूजा अर्चना की। उसके पश्चात गुरुदेव आचार्य पुलक सागर जी महाराज को जिनवाणी और गुरुदेव पुलक सागर को अर्घ्य चढ़ाया, जिनवाणी और शास्त्र भेंट किया। इसका सौभाग्य भी अशोक गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ।

भावों की साधना करें

इस पर आचार्य श्री पुलक सागर ने कहा कि आज उत्तम सत्य धर्म है। पूजन-आराधना के भाव चार होते हैं. उत्तम क्षमा, मांर्दव, आर्जव , शौच। सभी भाव हैं, ये क्रिया नहीं हैं, परिणाम हैं। ये सभी पवित्र भाव ही सच बोलोगे तो क्षमा, मार्दव, आर्जव और शौचधर्म आएगा। इनके उपायों से भावों को प्राप्त कर लिया जाता है। तो आकिंचन ब्रह्मचर्य जीवन का सार मिलता है। हमने चार भावों की साधना कर ली। उन्हें प्राप्त करने के लिए चार उपाय आज से शुरू होंगे। सत्य को जानने के लिए मौन रहो लोग कहते ही की दिशाओं में वास्तु दोष होता है लेकिन बुरा बोलने से वास्तु दोष होता है। भगवान महावीर ने कहा की सत्य को जानना हो तो मोन रहे यदि किसी को उपवास की अनुमोदना करनी हो तो कहो कि इस साल इन्होंने उपवास किए हैं। अगले साल मैं साधना करूंगा।

भगवान महावीर ने जैसा तप किया वैसा हम भी करेंगे तो ये अनुमोदना होगी। नवयुवक मंडल एवं जैन महिला मंडल की सांस्कृतिक मंत्री पलाश भवरा और नीलम किकवत ने बताया कि शिविर की कक्षाएं ठीक 4 बजे शुरू की गईं। 6,30 बजे भगवान की आरती की गई। सांयकालीन आरती का लाभ भी अशोक गंगवाल परिवार को प्राप्त हुआ। उसके पश्चात पारस से कैसे बने पुलक सागर नाटक का आयोजन किया गया। साथ ही पयुर्षण महापर्व पर जो जो महानुभाव उपवास कर रहे हैं, उनका समस्त समाज जनों द्वारा रात्रि को आरती के बाद गुरुकुल परिसर में अनुमोदना की गई।

इस अवसर पर तरुण क्रांति मंच, आदिनाथ एकता मंच, जैन युवा परिषद, पुलक मंच के सदस्य समाज के वरिष्ठ सदस्य नवयुवक मंडल के साथी दीक्षांत किकावत, अभिषेक दोवडिया, सुदर्शन भवरा, लव भवरा, दीपक भवरा, महिला मंडल की लता भानावत, आभा किकावत, मंच की सीमा किकावत रेवती मेहता और भी सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।

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